INTRODUCTION TO AN OUTPUT DEVICES / आउटपूट डिवाईस से एक परिचय
INPUT DEVICES द्वारा कंप्यूटर को जो भी INPUT दिया जाता है उसे CPU आउटपुट में बदल देता है , लेकिन CPU द्वारा जनरेटेड OUTPUT को प्राप्त करने के लिए DEVICES की आवश्यक्ता होती है इन्हे ही OUTPUT DEVICE कहा जाता है, कंप्यूटर में प्रयोग होने वाली कुछ प्रमुख आउटपुट डिवाईस निम्न प्रकार से है।
MONITOR
PRINTER
PLOTTER
SPEAKER
COMPUTER MONITOR
माॅनीटर एक OUTPUT DEVICE है जिसे VISUAL DISPLAY UNIT भी कहा जाता है, यह देखने में टीवी की तरह दिखाई देता है , कंप्यूटर जब युजर द्वारा दिये गये INPUT को OUTPUT में बदलकर देता है तब उसे देखने के लिए युजर को MONITOR की आवश्यक्ता रहती है , COMPUTER MONITOR परिणामो को इलेक्ट्राॅनिक माध्यम से SOFT COPY के रूप में प्रदर्शित करता है।
माॅनीटर के प्रकार को निम्न चित्र के माध्यम से समझ सकते हैं
MONOCHROME MONITOR
शब्द मोनोक्राॅम दो शब्दों से मिलकर बना है मोनो अर्थात सिंगल या एक , एवं क्राॅम अर्थात् कलर या रंग,। इस प्रकार के माॅनीटर आउटपुट को ब्लैक एंड व्हाईट के रूप में प्रदर्शित करते हैं।
GRAY-SCALE MONITORइस प्रकार के माॅनीटर किसी भी डिस्पले आॅब्जेक्ट को ग्रे शैड में दिखाते है अर्थात ना ही अधिक काला और न ज्यादा सफेद।
COLOR MONITOR
इस प्रकार के माॅनीटर आजकल सामान्य तौर पर उपयोग लिऐ जाते है, किसी भी कलर माॅनीटर में कंप्यूटर की मैमोरी क्षमता के अनुसार 16 से लेकर 16 लाख तक के रंगो में आउटपुट प्रदर्शित करने की क्षमता रखते हैं कलर माॅनीटर में सभी कलर काॅबिंनेशन इन तीन कलर से मिलकर बने होते है , जिन्हे RGB ( RED, GREEN , BLUE ) के नाम से जाना जाता है , रंगो के इस संयोजन को COLOR RESOLUTION कहा जाता है , इस रिसोलुशन के सबसे छोटे हिस्से को एक PIXEL कहा जाता है । जितने अधिक PIXEL होंगे OBJECT उतना ही अधिक साफ और COLORFUL दिखाई देगा।
CRT MONITOR
CRT माॅनीटर जिसका पुरा नाम
CATHODE RAY TUBE माॅनीटर होता है, इसका आविष्कार
कार्ल फर्डीनांड ब्राउन ने 1897 में किया था, इस माॅनीटर में पीछे की तरफ एक
ELECTRON GUN लगी रहती है जो इलेक्ट्राॅन का उत्सर्जन करती है ,ये इलेक्ट्राॅन किरणे
FOCUSING ANODE से होते हुए
CATHODE ELEMENT से टकराकर
ऋणावेशित [NEGATIVE CHARGE] हो जाती है और जब ये ऋणावेशित इलेक्ट्राॅन किरणें धनावेशित फाॅस्फर लेपित [
PHOSPHER COATED] स्क्रीन से टकराती है तो स्क्रीन चमकदार दिखाई देती है लेकिन इस पुरी प्रक्रिया में अत्यधिक मात्रा में इलेक्ट्राॅन उत्सर्जन [ELECTRON EMISSION] होता है जिसके कारण विद्युत की खपत अधिक होती है, CRT माॅनीटर का स्क्रीन रिजोल्युशन इतना अच्छा नहीं है जितना एलसीडी और एलईडी MONITOR का होता है, सीआरटी माॅनीटर आकार में बड़े एवं भारी होते है , बहुत सारी उपलब्धियों के होते हुए भी यही कुछ कारण है जिससे सीआरटी माॅनीटर का उपयोग आजकल कम हो गया है
LCD माॅनीटर का पुरा नाम LIQUID CRYSTAL DISPLAY माॅनीटर होता है, यह माॅनीटर FLAT PANEL DISPLAY श्रेणी के अंतर्गत आता है , सीआरटी माॅनीटर में बैकलाइट के रूप में जहांॅ एक इलेक्ट्राॅन गन का प्रयोग होता था वहीं पर LCD माॅनीटर में बैकलाईट के रूप में CCFL यानि की COLD CATHODE FLORESCENT LAMP का प्रयोग होता है,जिससे बिजली की खपत CRT के मुकाबले काफी कम हो गयी इस माॅनीटर मे POLARIZING FILTER का प्रयोग होता है जो PIXELS को POLARIZE कर के उन्हे IMAGE में बदलते है। यह माॅनीटर CRT माॅनीटर की तुलना में आकार में पतले , वजन में हल्के, एवं कम विद्युत खपत करने वाले होते हैं
LED MONITOR
LED माॅनीटर भी LCD माॅनीटर की तरह ही फ्लैट पैनल डिस्प्ले माॅनीटर होते हैं और इनमें भी बेहतर स्क्रीन रिजोलुशन के लिए लिक्विड क्रिस्टलीय प्रदार्थ माॅनीटर की सतह के अंदर भरा रहता है , और दिखने में भी ये माॅनीटर LCD माॅनीटर की तरह ही होता है लेकिन एक बहुत ही मुलभूत अंतर जो LED को LCD से अलग एवं ज्यादा उन्नत बनाता है वो है LED में बैकलाईट के रूप में प्रयोग होने वाली एलईडी तकनीक । यह तकनीक LCD में प्रयुक्त CCFL तकनीक से कहीं अधिक उन्नत है जिससे और भी अधिक कलर वैरियेशन इस प्रकार के माॅनीटर में दिखते है , और CRT , LCD माॅनीटर की अपेक्षा विद्युत की खपत भी काफी कम होती है , LED MONITOR पहले के अन्य MONITOR की अपेक्षा अधिक देर तक काम करने वाले, ज्यादा BRIGHTNESS वाले होते है
PRINTER
PRINTER एक ऐसी इलेक्ट्राॅनिक OUTPUT DEVICE है जिसका उपयोग SOFT COPY DATA को HARD COPY DATA में परिवर्तित करने के लिए किया जाता है |
सैद्धातिंक रूप से प्रिंटर दो प्रकार के होते है
IMPACT PRINTER
IMPACT PRINTER वो प्रिंटर है जो पैपर पर STRIKE यानि की प्रहार के द्वारा PRINT करते हैं, इस प्रकार के PRINTER में कागज के साथ में स्याही का एक RIBBON लगा रहता है,एक धातु या प्लास्टिक का HEAD रिबन से टकराता है , और टकराते ही PRINT HEAD पर जो भी अक्षर होता है वो कागज पर स्याहीयुक्त रिबन के संपर्क में आते ही अपना IMPRESSION यानि की प्रभाव छोड़ देता है इसी गुण के कारण इस प्रकार के गुण वाले PRINTER को IMPACT PRINTER कहा जाता है।
इंपैक्ट प्रिंटर श्रेणी में आने वाले प्रिंटर को हम नीचे दिये गऐ चित्र से समझ सकते हैं
जैसा कि नाम से ही पता चल रहा है CHARACTER PRINTER वे PRINTER होते है जो CHARACTER BY CHARACTER प्रिंट करते है तथा इनकी गति भी CPS [CHARACTER PER SECOND] में नापी जाती है |
DOT MATRIX PRINTER:-
DOT MATRIX प्रिंटर इंपैक्ट प्रिंटर श्रेणी में एक अत्यंत महत्वपूर्ण प्रिंटर है इस प्रिंटर में पिनों का एक HORIZONTAL समुह होता है जिसे MATRIX कहा जाता है ये पिन जब रिबन से टकराते हुए कागज को स्पर्श करती है तो एक DOT का निर्माण होता है , और ऐसे कई डाॅट्स मिलकर एक कैरेक्टर का निर्माण करते है , इस प्रिंटर के PRINT HEAD में पूर्व निर्धारित कोई FONT नहीं होता अतः इसमे किसी भी भाषा में प्रिटिंग की जा सकती है , इस प्रिंटर के PRINT HEAD में 7,9,14,18,24 पिनों का समुह होता है, इस PRINTER की प्रिंटिंग की गति 30 से 600 सीपीएस होती है, इस प्रिंटर की प्रिंट क्वालिटी इतनी अच्छी नहीं होती है, लेकिन फिर भी पारंपरिक रूप से आज भी इन पिं्रटर का उपयोग रेलवे , बस रिजर्वेशन काउंटर, ईमित्र शाॅप , रेस्टोरेंट इत्यादि में हो रहा है , इंपैक्ट प्रिंटिग श्रेणी के अधिकर PRINTER वर्तमान में भूला दिये गये है लेकिन DOT MATRIX प्रिंटर आज भी अपना अस्तित्व बनाऐ हुए है
DAISY WHEEL PRINTER
daisy wheel printer इंपैक्ट प्रिटिंग श्रेणी का प्रिंटर है, चंुकि इसके प्रिंट हैड की आकृति डैजी के फूल के समान दिखाई देती है जिसमें पहियेनुमा आकृति पर प्रिंट हैड पत्तियों के समान दिखाई देते हैं इसलिए इसे डैजी व्हील प्रिंटर नाम दिया गया। इस प्रिंटर की काफी धीमी लेकिन साफ प्रिटिंग होती है, इसके प्रिंट हैड के प्रत्येक spoke में एक कैरेक्टर उभरा रहता है जो कागज और रिबन के संपर्क में आते ही अक्षर उकेरता है , वर्तमान में ये प्रिंटर obsolete हो चुके है अर्थात इनका उपयोग नगण्य है।
LINE PRINTING:-
इस प्रकार की प्रिटिंग में प्रिंटर LINE BY LINE प्रिंट करता है , DRUM PRINTER और CHAIN PRINTER लाईन PRINTING के उदाहरण है, इनकी गति CPM में नापी जाती है
DRUM PRINTER :-
जैसा कि नाम से विदित है इस प्रिंटर का आकार ड्रम के समान होता है, इसलिए इस प्रिंटर को ड्रम प्रिंटर कहा जाता है, ड्रम की सतह पर अक्षर मुद्रित होते हैं, प्रिंटिग के लिए जब ड्रम को तेज गति से घुमाया जाता है तो प्रत्येक प्रिंट पोजीशन के विपरीत पेपर के पीछे हथोड़ा होता है, जिस अक्षर को प्रिटं करना होता है प्रिंट पोजीशन आते ही हथोड़ा चलता है और कागज रिबन के संपर्क में आकर अक्षर प्रिंट कर देता है, ड्रम प्रिंटर की औसत गति 300 से 2000 लाईन्स प्रति मिनट होती है।
CHAIN PRINTER :-
चैन प्रिंटर भी ड्रम प्रिंटर की तरह एक लाईन पिं्रटर होता है, जैसा कि नाम से विदित होता है इस प्रकार के प्रिटर में प्रिंटिग के लिए एक चैन का प्रयोग होता है जिसे प्रिंट चैन कहते हैं, चैन की प्रत्येक कड़ी में एक कैरेक्टर फाॅंट होता है, प्रत्येक प्रिट पोजीशन पर छोटे हथौड़े लगे होते हैं, ये हथोड़े कागज पर टकराकर एक बार में एक लाईन प्रिंट करते है, चैन प्रिंटर की गति 400 से 2500 कैरेक्टर प्रति मिनट होती है।
NON IMPACT PRINTING में प्रिंट हैड तथा कागज के मध्य किसी प्रकार का सीधा संपर्क नहीं होता है ,ना किसी प्रकार का इंप्रेशन पेपर पर तैयार होता ह,ै इसलिए इस प्रकार के पिं्रटर को नाॅन इपैक्ट प्रिंटर कहा जाता है । साथ ही ये प्रिंटर बहुत कम आवाज किये ही तीव्र गति से उच्च क्वालिटी की प्रिटिंग तैयार करते हैं।
LASER PRINTER
लेजर प्रिंटर नाॅन इंपैक्ट श्रेणी का एक प्रमुख पेज पिं्रटर है जो एक मिनट में लगभग 200 पेज पिं्रट कर सकता है। लेजर प्रिंटर का आविष्कार GARY STARK WEATHER ने किया था। ,लेजर प्रिंटर उच्च गति एवं उच्च गुणवत्ता की प्रिंटिंग के लिए जाना जाता है लेजर प्रिंटर में एक बेलनाकार बाॅक्स लगा रहता है जिसे टोनर कहा जाता है , जिसमें विभिन्न रंगो की स्याही के कण एक सुखे पाउडर के रूप में भरे रहते हैं , यह पिं्रटर की कार्यपद्धति लगभग फाॅटोकाॅपी मशीन की तरह ही होती है जिसमें लेसर लाईट के माध्यम से प्रिंटिंग की जाती है , लेजर प्रिंटर का लागत मुल्य इंकजैट प्रिंटर की अपेक्षा थोड़ा ज्यादा होता है लेकिन लंबी समयावधि में रखरखाव और अन्य सभी मदों को देखा जाऐ तो लेजर प्रिंटर इंकजैट प्रिंटर से भी कम मुल्य में पड़ता है , शायद इसलिए ही लेजर प्रिंटर आज भी दुनिया भर में सर्वाधिक प्रचलित प्रिंटर है
INKJET PRINTER
जैसा कि नाम से ही पता चल रहा है INKJET PRINTER में प्रिंटिग के लिए एक NOZZLE से कागज पर स्याही की बुंदो की बौछार करके कैरेक्टर एवं ग्राफिक्स पिं्रट किये जाते है। इस प्रकार के पिं्रटर में रंगीन प्रिंटिग के लिए स्याही के चार नोजल होते हैं CYAN, MAGENTA, YELLOW, BLACK इसलिए इसे CMYK पिं्रटर भी कहा जाता है, ये चारो रंगों से मिलकर कलर प्रिटिंग के लिए आवश्यक कई रंग बनाऐ जा सकते है।
इंकजैट पिं्रटर में INK CLOGGING की समस्या रहती है अर्थात यदि बहुत दिनों तक अगर प्रिटिंग ना की जाऐ तो कार्टिªज की मुहाने पर स्याही जम जाती है जिससे और प्रिंटिंग नहीं की जा सकती, वैसे आजकल आने वाले इंकजैट प्रिंटर में इस समस्या का निदान हो गया है,घरेलु उपयोग के लिए तथा छोटे व्यवासायिक उद्धेश्य के लिए आज भी इन प्रिंटर का उपयोगे किया जाता है
PHOTO PRINTER
फोटो पिं्रटर वे प्रिंटर है जो विशेष रूप से फोटो पिं्रटिंग के लिए ही बनाऐ गये है, इस प्रकार के प्रिंटर में एक कार्ड रीडर का स्लोट लगा रहता है जिसमें हम अपने डिजीटल कैमरा का मैमोरी कार्ड लगा कर उसमें से फोटो प्रिंट कर सकते हैं , फोटो प्रिंटर से प्रिंट होने वाले फाॅटो की क्वालिटी लेसर और इंकजैट प्रिेंटर की अपेक्षा काफी अच्छी होती है इस प्रिंटर की सबसे अच्छी बात यह होती है कि ये पोर्टेबल होते है अर्थात इन्हें कहीं भी ले जाया जा सकता है
THERMAL PRINTER
इस प्रकार के प्रिंटर में किसी भी तरह की एक्सटरनल इंक का प्रयोग नहीं किया जाता है बल्कि इसमे कागज पर वैक्स आधारित रिबन से अक्षर प्रिंट किये जा सकते हैं। इस प्रिंटर के द्वारा प्रिंट किया गया टैक्सट ज्यादा देर तक नहीं रहता है कुछ समय बाद ही पैपर से मिट जाता है , सामान्यतया इस प्रकार के प्रिंटर का उपयोग ATM में होता है।
PLOTTER
प्लाॅटर भी प्रिंटर की तरह एक हार्डवेयर आउटपुट डिवाईस है, जो प्रिटिंग के लिए उपयोग लिया जाता है लेकिन प्रिंटर जहां पर RASTER IMAGE तैयार करता है वहीं पर प्लाॅटर एक VECTOR IMAGE तैयार करता है, प्रिंटर द्वारा तैयार की गई RASTER IMAGE एवं प्लाॅटर द्वारा तैयार की गई VECTOR IMAGE मे अंतर यह है कि प्रिंटर में प्रिंटिंग के लिए जहां पर TONER या CARTRIDGE का इस्तेमाल किया जाता है वहीं पर प्लाॅटर में TONER या CARTRIDGE के स्थान पर PEN , PENCIL ,MARKER PEN या अन्य किसी लेखन डिवाईस का प्रयोग करता है, प्लाॅटर का आविष्कार रैमिंग्टन रैंड नामक कंपनी के द्वारा 1953 में किया गया था , जिसका उपयोग सर्वप्रथम UNIVAC कंप्यूटर के सहयोग से तकनीकी चित्र बनाने के लिए किया गया था
मुख्य रूप से प्लाॅटर का उपयोग चार्ट ,ग्राफ , ड्राॅइंग नक्शे इत्यादि बनाने में किया जाता है
प्रमुख रूप से प्लाॅटर 2 प्रकार के होते है
1 DRUM PLOTTER
2 FLATBED PLOTTER
1 DRUM PLOTTER :-
इस प्लाॅटर में कागज एक ड्रम के ऊपर चढ़ा रहता है, जो धीरे धीरे खिसकता जाता है , खिसकते हुऐ कागज पर प्रिंट करने के लिए प्रिंट हैड पर एक फाईबर टिप्ड पैन लगा रहता है जो दांये बाऐं घुम कर प्रिंटिंग करता है, कई कलर प्लाॅटर में 4 या 4 से अधिक प्लाॅटर का भी प्रयोग होता है, प्लाॅटर की गति को आईपीएस अर्थात् इंच प्रति सैकंड में नापा जाता है, इस प्रकार के प्लाॅटर का प्रयोग बड़े बड़े फ्लैक्स , बैनर, पाॅस्टर इत्यादि बनाने में किया जाता है
2 FLATBED PLOTTER :-
फ्लेटबैड प्लाॅटर में कागज को एक फ्लेट अर्थात समतल सतह वाली ट्रे में रखा जाता है जिसके ऊपर एक भुजा में कंप्यूटर नियंत्रित पेन लगा रहता है जो आगे पीछे गति करके समतल सतह पर रखी गई शीट पर प्रिंटिंग करता है, इस प्रकार के प्लाॅटर का प्रयोग प्रमुख रूप से सिविल, मैकेनिकल, संबधी ड्राफ्टिंग के लिए किया जाता है
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